क्या A-SAT वेपन????? *************************जिससे भारत बना "अंतरिक्ष में महाशक्ति"
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➡ भारत ने अंतरिक्ष में बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत, अमेरिका, चीन और रूस के बाद 'ऐंटी सैटलाइट वेपन' (A-SAT )सफलतापूर्वक लॉन्च करने वाला चौथा बड़ा देश बन गया है ।
👉क्या है एंटी सैटेलाइट वेपन (ASAT) ?
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एंटी-सैटेलाइट वेपन ( ASAT ) मिसाइल दरअसल वह स्पेस वेपन होते हैं जिन्हें इस तरह से डिजाइन किया जाता है जो दुश्मन की ओर से मिलिट्री जासूसी के मकसद से तैयार किए गए सैटेलाइट को नष्ट कर सकते हैं । इसका साफ मतलब है कि भारत के पास अब इस तरह का हथियार है जो अंतरिक्ष में भी दुश्मन को निशाना बना सकता है।
👉 दरअसल, वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर एनईओ (लो अर्थ ऑर्बिट) में एक लाइट सैटलाइट को मार गिराया और केवल तीन मिनट में सफलता के साथ यह मिशन पूरा हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 27 मार्च 2019 को देश के नाम संदेश देते हुए बताया कि भारत ने पृथ्वी की निचली कक्षा में एंटी सैटेलाइट मिसाइल से एक सैटेलाइट को मार गिराया है । यह सैटेलाइट भारत में ही विकसित किया गया है। भारत के वैज्ञानिकों की ओर से जिस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है, वह पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit) में किया गया है ।ऐसे में आपको बताते हैं कि आखिर यह लो अर्थ ऑर्बिट क्या है ?
भारत ने पृथ्वी की सतह से 300 किलोमीटर दूर एक सजीव सैटेलाइट को गिराया है। लो अर्थ ऑर्बिट यानी पृथ्वी की निचली कक्षा पृथ्वी के सबसे नजदीक ऑर्बिट (कक्षा) है ।यह पृथ्वी की सतह से 160 किलोमीटर (99 मील) और 2,000 किलोमीटर (1,200 मील) के बीच ऊंचाई पर स्थित है ।
यह पृथ्वी की सतह से सबसे नजदीक है।लो अर्थ ऑर्बिट के बाद मिडियन अर्थ ऑर्बिट, Geosynchronous ऑर्बिट और उसके बाद हाई अर्थ ऑर्बिट है. हाई अर्थ ऑर्बिट पृथ्वी की सतह से 35,786 किलोमीटर पर स्थित है ।
बता दें कि साल 2022 में जो भारत की ओर से जो तीन भारतीय अंतरिक्ष भेजे जाएंगे, वो भी इस लो अर्थ ऑर्बिट में रहेंगे। इस प्रोजेक्ट को लेकर इसरो ने कहा था कि सिर्फ 16 मिनट में तीन भारतीयों को श्रीहरिकोटा से स्पेस में पहुंचा दिया जाएगा और तीनों भारतीय स्पेस के 'लो अर्थ ऑर्बिट' में 6 से 7 दिन बिताएंगे।
वहीं हाल ही में कुछ सैटेलाइट इस कक्षा में भेजे गए थे। निचली कक्षा से जमीन की दूरी कम होने की वजह से कनेक्शन काफी बेहतर होता है। कई सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट की स्पीड में इजाफा करने का प्रयास भी किया गया है।
भारत ने पृथ्वी की सतह से 300 किलोमीटर दूर एक सजीव सैटेलाइट को गिराया है। लो अर्थ ऑर्बिट यानी पृथ्वी की निचली कक्षा पृथ्वी के सबसे नजदीक ऑर्बिट (कक्षा) है ।यह पृथ्वी की सतह से 160 किलोमीटर (99 मील) और 2,000 किलोमीटर (1,200 मील) के बीच ऊंचाई पर स्थित है ।
यह पृथ्वी की सतह से सबसे नजदीक है।लो अर्थ ऑर्बिट के बाद मिडियन अर्थ ऑर्बिट, Geosynchronous ऑर्बिट और उसके बाद हाई अर्थ ऑर्बिट है. हाई अर्थ ऑर्बिट पृथ्वी की सतह से 35,786 किलोमीटर पर स्थित है ।
बता दें कि साल 2022 में जो भारत की ओर से जो तीन भारतीय अंतरिक्ष भेजे जाएंगे, वो भी इस लो अर्थ ऑर्बिट में रहेंगे। इस प्रोजेक्ट को लेकर इसरो ने कहा था कि सिर्फ 16 मिनट में तीन भारतीयों को श्रीहरिकोटा से स्पेस में पहुंचा दिया जाएगा और तीनों भारतीय स्पेस के 'लो अर्थ ऑर्बिट' में 6 से 7 दिन बिताएंगे।
वहीं हाल ही में कुछ सैटेलाइट इस कक्षा में भेजे गए थे। निचली कक्षा से जमीन की दूरी कम होने की वजह से कनेक्शन काफी बेहतर होता है। कई सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट की स्पीड में इजाफा करने का प्रयास भी किया गया है।
➡ बता दें कि इसरो और डीआरडीओ के संयुक्त प्रयास के द्वारा इस मिसाइल को विकसित किया गया है ।अब तक अंतरिक्ष में मार करने की शक्ति केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास था । एंटी सेटेलाइट (ASAT) के द्वारा भारत अब अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को सुरक्षित रख सकेगा।
➡ कैसे होगा इससे भारत को फायदा
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👉इसकी मदद से अब कोई भी देश जो भारतीय सीमा में ऑर्बिट अटैक करने की कोशिश करेगा तो भारत उसे मार गिरा सकता है ।भारत और चीन के बीच जारी तनाव को देखते हुए भारत के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है।
👉एंटी सैटेलाइट वेपन अंतरिक्ष से एक मीटर चौड़ी वस्तुओं की पहचान कर सकता है। एसैट वेपन दुश्मन को देश की जासूसी करने से रोक सकता है।इसके अलावा अब भारत के पास यह क्षमता है कि वह दुश्मन के कम्यूनिकेशन को नुकसान पहुंचा दे । सरल भाषा में कहे तो भारत के पास अब एक ऐसी मिसाइल है जो अंतरिक्ष में उपग्रहों को मार सकती है।
👉ये भी जानें :- सबसे पहले 1967 में अमेरिका, 1970 में रूस और इसके बाद साल 2007 में चीन ने इसका सफल परिक्षण किया. भारत 2010 से इसे बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा था, अब भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में विश्व का चौथा बड़ा देश बन गया है ।
धन्यवाद ।।
https://youtu.be/_qcgwYrVhJE

